Achhikhabar motivational story in hindi-सही कीमत
in

Achhikhabar motivational story in hindi-सही कीमत

Win iPhone 14 100% Free 🤩🤩

Win iPhone 14 Free Online

100% Safe & Secure No Spam👍️

एक बार आचार्य महावीर प्रसाद द्विवेदी अपने खेतों को देखकर गांव वापस जा रहे थे कि उन्हें एक चीख सुनाई दी । एक अछूत स्त्री को सांप ने काट लिया था । द्विवेदी जी दौड़कर उसके पास गए और कुछ और न पाकर अपना जनेऊ तोड़कर स्त्री के पैर में सांप द्वारा काटे गए स्थान से थोड़ा ऊपर कसकर बांध दिया। फिर चाकू से उस स्थान पर चीरा लगाकर दूषित खून बाहर निकाल दिया । स्त्री की जान बच गई। 

इतनी देर में वहां गांव के कई पंडित और अन्य लोग इकट्ठे हो गए। 

पंडित आपस में ही बोले, ” धर्म की नाव तो आज डूब गई। देखो तो इस महावीर को, ब्राह्मण होकर जनेऊ जैसी पवित्र वस्तु को एक अछूत स्त्री के पैर से छुआ दिया। अब कौन हम ब्राह्मणों का सम्मान करेगा। इन अछूतों और हममें फर्क ही क्या रह गया ?” 


उनकी ऐसी बातें सुन द्विवेदी जी जोर से बोले, “इस जनेऊ के कारण ही एक स्त्री की जान बची है। तुम्हें यह नहीं दिखाई देता । मैं खुश हूं कि आज मेरा ब्राह्मण होना किसी के काम आ सका। आज से पहले इस जनेऊ की कीमत ही क्या थी । यह मुझ पर ब्राह्मण होने के ढोंग की तरह लिपटा रहता था। मैं शायद इसे उतारकर फेंक भी देता, परंतु आज इसने इस अछूत की जान बचाकर अपनी असली उपयोगिता साबित कर दी है । अब मैं शायद ही कभी इस जनेऊ को उतारने का खयाल करूंगा । ” 


द्विवेदी जी की बातों का किसी के पास कोई जवाब नहीं था । 


Motivational story in hindi-भाग्य का बीज 

एक युवक कुम्हार का काम करता था । उसका मिट्टी के बरतनों का व्यापार अच्छा चल रहा था । परंतु वह गोशालक का अनुयायी था, इसलिए कट्टर भाग्यवादी था । 


एक बार भगवान महावीर उनके गांव से गुजरे। युवक महावीर से अपनी मान्यता को लेकर बहस करने लगा । 


महावीर ने पूछा, “अच्छा बताओ, ये मिट्टी के बरतन कौन बनाता है ?” 


युवक बोला, “मैं बनाता हूं, क्योंकि मेरी नियति में यही है । ” 


” जो कोई इन्हें फोड़ दे तो ?” महावीर ने पूछा । 


” तो मैं मान लूंगा कि इनके भाग्य में इसी तरह फूटना लिखा होगा । ” युवक आवेग में बोला । 


” अगर कोई तुम्हें अकारण थप्पड़ मार दे तो ?” महावीर ने मुस्कराते हुए पूछा । 


उनकी बात सुनकर युवक तैश में आ गया, बोला, “तो मैं भी उसे वैसा ही जवाब दूंगा ।” 


” अब तुम नियति के बीच क्यों आ रहे हो। हो सकता है तुम्हारी नियति में किसी के हाथों अकारण थप्पड़ खाना लिखा हो ।” महावीर बोले । 


युवक को बात समझने में देर नहीं लगी । 


भाग्य का बीज तो पुरुषार्थ में होता है, ” महावीर ने युवक को समझाया और अपने रास्ते पर आगे बढ़ गए। 



Motivational story-गीता का मर्म 

एक बार महात्मा गांधी के पास एक व्यक्ति आया । उसने गांधी जी से कहा, “मैं आपसे गीता का रहस्य जानने आया हूं।” 


महात्मा गांधी उस समय आश्रम की भूमि फावड़े से खोद रहे थे । उन्होंने उस व्यक्ति से कहा कि आप बैठिए और फिर वे भूमि खोदने के काम में जुट गए और काफी देर तक भूमि खोदते रहे । जब उन्हें खोदते खोदते काफी देर हो गई तो उस व्यक्ति का धैर्य जवाब दे गया और उसने गांधी जी से कहा, “मैं इतनी दूर से आपकी ख्याति सुनकर गीता का मर्म समझने आपके पास आया था, लेकिन आपको सिर्फ काम का महत्व ही अधिक जान पड़ता है ?” 


इस पर गांधी जी हंसते हुए बोले, “भाई, गीता का ही रहस्य तो मैं आपको समझा रहा हूं।” 


“कहां समझा रहे हैं, कब से यहां बैठा हूं, आपने एक शब्द भी नहीं कहा । ” वह व्यक्ति गांधी जी से बोला । 


गांधी जी ने कहा, “बोलने की आवश्यकता ही क्या है ? गीता का उपदेश ही यह है कि बस कर्म करो। मैं तब से आपके सामने कर्म ही तो कर रहा था और गीता का रहस्य भी यही है, निरंतर कर्म करो, फल की आशा मत करो। ” 

गांधी जी के इस उत्तर को सुनकर उस व्यक्ति को गीता का रहस्य समझ में आ गया और वह गांधी जी को प्रणाम कर बिना कुछ कहे वहां से चला गया। 

Download Video

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

GIPHY App Key not set. Please check settings

Win iPhone 14 100% Free 🤩🤩

Win iPhone 14 Free Online

100% Safe & Secure No Spam👍️